नालागढ़। नगर परिषद नालागढ़ के विकास कार्यों की हकीकत उस वक्त सामने आई, जब बाजार क्षेत्र में महज 15 दिन पहले बनी नई सड़क प्री-मानसून की पहली बारिश में ही बह गई। नालागढ़ अस्पताल मार्ग पर बनी यह सड़क, जिसमें टाइलें और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया था, बारिश की मामूली मार भी नहीं झेल पाई। सड़क का मध्य भाग धंस गया, टाइलें उखड़ गईं, और 30-40 फुट का हिस्सा पूरी तरह बर्बाद हो गया। इस घटना ने स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में भारी रोष पैदा कर दिया है, जो इसे नगर परिषद की लापरवाही और घटिया निर्माण का नतीजा मान रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि इस सड़क का निर्माण कार्य तीन-चार महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन शुरू से ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे। निर्माण के कुछ ही दिनों बाद धूल और मिट्टी उड़ने की शिकायतों के चलते नगर परिषद ने ठेकेदार से दोबारा मरम्मत करवाई थी। इसके बावजूद, पहली बारिश ने सड़क की सारी कमियां उजागर कर दीं। दुकानदारों का कहना है कि सड़क में सीमेंट का इस्तेमाल न के बराबर था, जिसके कारण टाइलें आसानी से उखड़ गईं और कंक्रीट दरक गया।
स्थानीय निवासी विनोद शर्मा ने गुस्से में कहा, "मैंने तो निर्माण शुरू होने पर ही नगर परिषद को सुझाव दिया था कि काम में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए। लेकिन किसी ने एक न सुनी। अभी तो सड़क बने 15 दिन भी नहीं हुए, और पहली बारिश ने इसकी पोल खोल दी। यह सड़क बिना सीमेंट के बनी थी, और टाइलें तो ऐसी लगाई गईं जैसे बस दिखावे के लिए। सत्ता पक्ष के लोग, जो सालों से कुर्सी पर बैठे हैं, उन्हें जनता की कोई परवाह नहीं।" विनोद ने आगे कहा, "यह जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषियों को सजा मिले।"
एक अन्य स्थानीय दुकानदार ओमकार गुप्ता ने भी नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह सड़क हमारे बाजार और अस्पताल जाने का मुख्य रास्ता है। इतने जरूरी मार्ग पर भी अगर घटिया सामग्री का इस्तेमाल होगा, तो बाकी शहर का क्या हाल होगा? ठेकेदार और नगर परिषद की मिलीभगत साफ नजर आती है। दो बार काम करवाने के बाद भी सड़क का यह हाल है। बारिश ने तो जैसे नगर परिषद के सारे दावों की हवा निकाल दी। हम चाहते हैं कि इसकी उच्चस्तरीय जांच हो, और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।"
नगर परिषद के बड़े-बड़े दावों के उलट, यह सड़क निर्माण उनकी नाकामी का जीता-जागता सबूत बन गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क के बीच में नाले के ऊपर कंक्रीट डाली गई थी, जबकि किनारों पर टाइलें लगाई गई थीं। लेकिन निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते पहली बारिश में ही सड़क गड्ढे में तब्दील हो गई। दुकानदारों का कहना है कि यह सड़क रोजमर्रा के आवागमन और अस्पताल जाने के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी खस्ता हालत से व्यापार और आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से इस मामले की गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर पहली बारिश में सड़क का यह हाल है, तो पूरे मानसून में क्या स्थिति होगी? लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस घटना ने नालागढ़ नगर परिषद के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा कर दिया है, और जनता जवाब चाहती है कि उनके टैक्स के पैसे का आखिर हुआ क्या?


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