मुंबई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार (7 अप्रैल 2025) को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में ही भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 3,939.68 अंक टूटकर 71,425.01 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 1,160.8 अंक फिसलकर 21,743.65 पर आ गया। वैश्विक व्यापार युद्ध की बढ़ती आशंकाओं और अमेरिकी बाजारों में मची उथल-पुथल का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। इसी बीच, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में भी 30 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई और यह 85.74 पर कारोबार करता दिखा।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में डूबे नजर आए। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और एलएंडटी जैसे शेयर भी दबाव में रहे। एनएसई के सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा टूटा, जबकि आईटी, ऑयल एंड गैस और हेल्थकेयर सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, रियल्टी और मीडिया इंडेक्स 5% से अधिक नीचे लुढ़क गए। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का नतीजा है।
शुक्रवार से शुरू हुआ संकट
यह संकट शुक्रवार (4 अप्रैल) से गहराने लगा था, जब वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं के बीच सेंसेक्स 930.67 अंक गिरकर 75,364.69 पर बंद हुआ था। उस दिन कारोबार के दौरान यह 1,054.81 अंक तक नीचे चला गया था। इसी तरह, निफ्टी 345.65 अंक गिरकर 22,904.45 पर बंद हुआ था, और दिन के निचले स्तर पर यह 382.2 अंक नीचे 22,867.90 पर पहुंच गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले और चीन की ओर से जवाबी टैरिफ के ऐलान ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी थी।
एशिया से अमेरिका तक हाहाकार
एशियाई बाजारों में भी सोमवार को भारी गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 6%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.5%, और चीन का शंघाई इंडेक्स 6.5% नीचे लुढ़क गया। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग तो 10% की भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, अमेरिकी बाजार भी इस संकट से अछूते नहीं रहे। शुक्रवार को डॉव जोन्स में 2,231 अंक (5.5%) की गिरावट आई, जो कोविड संकट के बाद सबसे बड़ी सिंगल-डे गिरावट थी। एसएंडपी 500 में 5.97% और नैस्डैक कंपोजिट में 5.82% की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है। एक विश्लेषक ने कहा, "ट्रंप के टैरिफ और चीन के जवाबी कदमों ने निवेशकों में डर पैदा कर दिया है। रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने हालात को और बिगाड़ दिया है।" फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बरकरार रहने की आशंका है, और निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों और घरेलू नीतियों पर टिकी है।
यह खबर आज सुबह 10:10 बजे (IST) तक की ताजा स्थिति पर आधारित है। आगे की जानकारी के लिए बाजार पर नजर रखें।


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