देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में अवैध खनन को लेकर दिए अपने बयान पर उठे विवाद को लेकर सफाई दी है। सोमवार को देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "मैं अब दिल्ली में हूं और मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना।" त्रिवेंद्र ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का राज्य की मौजूदा राजनीति या सरकार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके बयान को तोड़-मरोड़कर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन वह ऐसा करने वालों को रोक नहीं सकते।
त्रिवेंद्र ने जोर देकर कहा कि उन्होंने संसद में राज्य में खनन का नहीं, बल्कि अवैध और अवैज्ञानिक खनन का मुद्दा उठाया था। उनका कहना था, "हमने इस पार्टी को अपने खून से सींचा है। मैं क्यों चाहूंगा कि सरकार अस्थिर हो?" उन्होंने अपनी चिंता को पर्यावरण और आम लोगों के जीवन से जोड़ा, न कि किसी व्यक्तिगत हमले से। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खनन से राज्य का राजस्व बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन इसे वैज्ञानिक तरीके से करना जरूरी है ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो।
एक अधिकारी की टिप्पणी पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर भी त्रिवेंद्र ने सफाई दी। उन्होंने कहा, "मेरी टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं थी। जब मैं मुख्यमंत्री था, तो लोग कहते थे कि त्रिवेंद्र अधिकारियों की सुनता है। अधिकारियों ने मेरा सम्मान किया और मेरे निर्देशों पर काम किया।" उनका आरोप था कि मीडिया ने उनकी बात को अधूरा और संदर्भ से हटकर पेश किया, जिसे कुछ लोग मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
त्रिवेंद्र के इस बयान की टाइमिंग पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि राज्य में हाल के दिनों में राजनीतिक हलचल तेज हुई है। हालांकि, उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी मंशा सिर्फ जनहित और पर्यावरण संरक्षण की है, न कि किसी राजनीतिक लाभ की। इस बयान के बाद भी उनके समर्थक और आलोचक इस पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन त्रिवेंद्र ने साफ कर दिया कि वह दिल्ली में अपनी सांसद की भूमिका पर केंद्रित हैं।


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