अल्मोड़ा। पहाड़ की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से स्थापित अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। यह इलाज का केंद्र बनने के बजाय एक रेफरल सेंटर बन गया है। संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को बिना उचित इलाज के हल्द्वानी भेजा जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे ने कालेज प्रशासन पर खासकर महिला मरीजों के उपचार में बहानेबाजी करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा है कि इन दिनों जिला महिला चिकित्सालय में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे सिजेरियन ऑपरेशन पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा भेजा जाता है, लेकिन वहां भी सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों के अभाव के कारण उन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन गर्भवती महिलाओं को अल्मोड़ा में गंभीर बताकर हल्द्वानी रेफर किया जाता है, वहीं हल्द्वानी में उनका सामान्य प्रसव आसानी से हो जाता है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में कभी नेओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट एनआईसीयू फुल होने का बहाना बनाया जाता है। तो कभी पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट पीआईसीयू में जगह न होने की बात कहकर मरीजों को हल्द्वानी भेज दिया जाता है।
उन्होंने कहा है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और पहाड़ के लोगों के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार हर साल नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणाएं कर रही है, लेकिन पहले से बने कॉलेजों की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
उनके अनुसार इस समय अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।
इसके अलावा जरूरी उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है। यही नहीं जनप्रतिनिधि सिर्फ ज्ञापन देने तक सीमित हैं, लेकिन किसी ने इस मुद्दे को सदन में नहीं उठाया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं, तो सरकार नए मेडिकल कॉलेजों की घोषणाएं क्यों कर रही है? क्या सरकार सिर्फ इमारत खड़ी करने को ही स्वास्थ्य सुविधा मान रही है?
सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के प्रयासों से तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के निरंतर प्रयासों से गायनी (स्त्री रोग), सर्जरी और फार्मा विभाग में तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो चुकी है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन समस्या का संपूर्ण समाधान नहीं।
उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज, उच्चाधिकारियों से सीधा संपर्क कर रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई गई है।
उन्होंने कहा है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज सिर्फ एक दिखावटी इमारत बनकर रह जाएगा, जिससे पहाड़ के लोगों की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट जाएंगी। अब समय आ गया है कि सरकार और जनप्रतिनिधि नींद से जागें और जनता को उनका हक दिलाएं।


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