देहरादून। वर्ष 1999 में चमोली में हुई शासकीय अधिवक्ता के हत्या के आरोपी ऋषिकेश के रहने वाले सुरेश शर्मा को एसटीएफ ने झारखंड के जमशेदपुर से गिरफ्तार किया गया है। उसे हत्या के एक चर्चित मामले में 40 दिन बाद ही जमानत मिल गई थी, लेकिन इसे कुछ दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, तब से ही वह लगातार फरार चल रहा था, पुलिस ने उस पर दो लाख रुपये का ईनाम भी रखा। सुरेश उत्तराखंड का पहला इनामी अपराधी है। एसटीएफ की इस उपलब्धि पर डीजीपी ने इनाम देने का ऐलान किया है।
उत्तराखंड के आईजी कानून व्यवस्था नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि अंकुर गैस एजेंसी ऋषिकेश का रहने वाला सुरेश शर्मा वर्ष 1998 में वहां क्वालिटी नाम का रेस्टोरेंट चलाता था। इस रेस्टोरेंट को लेकर उसका शासकीय अधिवक्ता बालकृष्ण भट्ट से विवाद चल रहा था। दोनें के बीच कई बार झगड़ा भी हो चुका था ।
बालकृष्ण भट्ट वर्ष 1999 में चमोली में तैनात थे। अपने इसी विवाद की खुन्नस निकलने के लिए सुरेश शर्मा 28 अप्रैल 1999 को चमोली गया था। इस दौरान वह भट्ट से मिला और सरेआम उनकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी।
पुलिस ने सुरेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया। लेकिन 40 दिन बाद ही उसे स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी। इसे लेकर पुलिस ने भी ऊपरी अदालतों में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत खारिज कर दी। लेकिन, सुरेश शर्मा फिर कभी उत्तराखंड नहीं आया। तब से पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी।
आई जी के अनुसार पुलिस की टीमों झारखंड, पश्चिम बंगालऔर महाराष्ट्र की खूब खाक छानी लेकिन सुरेश शर्मा पुलिस के हाथ नहीं आया। अब एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने इंस्पेक्टर अबुल कलाम की टीम को लगाया। उनकी टीम ने नए सिरे से सुरेश की तलाश शुरू की। इस बीच कलाम की टीम के खबर लगी कि सुरेश झारखंड के जमशेदपुर में नाम बदल की छिपा बैठा है।
उन्होंने बताया कि यह स्वाभाविक है कि 25 साल लंबे अंतराल में सुरेश शर्मा का चेहरा काफी बदल चुका था। एसटीएफ ने उसके चेहरे को कई संदिग्धों से मिलाया। कई सॉफ्टवेयर का सहारा भी लिया गया। एसटीएफ ने उसके चमोली जेल से फिंगर प्रिंट्स हासिल किए।
इन फिंगर प्रिंट्स को पश्चिम बंगाल में टारगेट पर रखे गए संदिग्ध से मिलान कराया गया। जब यह बात पुष्ट हो गई कि सुरेश शर्मा ही पुलिस के टारगेट पर है, तो टीम ने 23 जनवरी को उसे किसी काम से जमशेदपुर के एक आफिस में जाते समय गिरफ्तार कर लिया। अब स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे उत्तराखंड लाया गया है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल की पूछताछ में सुरेश शर्मा ने बताया कि जमानत मिलने के बाद वह महाराष्ट्र में अपने रिश्तेदार के घर चला गया था। उसे जब पता चला कि उसकी जमानत खारिज हो गई है तो वह छिप गया। उसे कई बार घरवालों ने ऋषिकेश बुलाया लेकिन वह वापस नहीं लौटा।
महाराष्ट्र से वह पश्चिम बंगाल गया। वहां उसने ठेली पर खाना बनाना शुरू किया। कुछ दिन बाद उसने स्क्रैप का काम शुरू किया और एक कंपनी बना ली। इसी कंपनी के काम से वह देश के कई हिस्सों में आता जाता रहता था। जब वह जमशेदपुर आया तो उसे पकड़ लिया गया।


No comments:
Post a Comment