सेब सम्राट हरिमन शर्मा को पद्मश्री : बिलासपुर ही नहीं हिमाचल का सिर भी गर्व से हुआ ऊंचा - सत्यमेव जयते

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Sunday, January 26, 2025

सेब सम्राट हरिमन शर्मा को पद्मश्री : बिलासपुर ही नहीं हिमाचल का सिर भी गर्व से हुआ ऊंचा


शिमला। निचले हिमाचल में सेब क्रांति के जनक बिलासपुर की घुमारवीं तहसील के गलांसी गांव के रहने वाले हरिमन शर्मा को पदमश्री अवार्ड की घोषणा ने बिलासपुर ही नहीं बल्कि समूचे हिमाचल को सिर गर्व से ऊंचा उठाने का मौका दिया है।  

हरिमन शर्मा गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री सम्मान के लिए नामित हुए हैं। इन्होंने गर्म क्षेत्र में सेब पैदा कर अपनी आर्थिक स्थिति तो मजबूत की साथ ही इसकी आपूर्ति कर पड़ोसी राज्यों में भी मिठास घोल रहे हैं। सात जुलाई 2007 वह 10 किलो सेब व पांच किलो आम लेकर शिमला स्थित सचिवालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिलने पहुंचे और उन्हें बताया कि ये दोनों फल उन्होंने बिलासपुर में उगाए हैं। यह सेब 40-45 डिग्री तापमान वाले क्षेत्र में भी तैयार हो सकता है।

हरिमन शर्मा ने कम ठंडे इलाकों में उगने वाली वाली सेब की किस्म 'एचआरएमएन-99 विकसित की है। लो चिलिंग क्षेत्र वाली यह किस्म समुद्र तल से 1800 फीट की ऊंचाई में भी उग जाती है। सेब उत्पादन के इतिहास में यह नवाचार था। परंपरागत क्षेत्र का सेब जुलाई से सितंबर तक तैयार होता है मगर गर्म इलाके का यह सेब जून में तैयार हो जाता है।

हरिमन शर्मा की तैयार की गई इस प्रजाति के 14 लाख पौधे भारत, नेपाल, बांग्लादेश, जाम्बिया व जर्मनी के एक लाख बागबानों ने लगाए हैं। इसके अलावा छह हजार से अधिक लोगों को 1.9 लाख से अधिक पौधे वितरित किए हैं। हरिमन सेब के अलावा, अपने बाग में आम, कीवी और अनार के पेड़ भी उगाते हैं।

इस पर तभी सीएम ने बैठक करके पनियाला स्थित उनके बगीचे का निरीक्षण करवाया। 15 अगस्त 2008 को सीएम ने उन्हें प्रेरणास्रोत सम्मान से सम्मानित किया। उनके लिए यह पहला सम्मान था। अब तक उन्हें 15 राष्ट्रीय अवार्ड, 10 राज्यस्तरीय अवार्ड व पांच अन्य अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं।

हरिमन शर्मा का जन्म चार अप्रैल, 1956 को ग्राम गलासीं, डाकघर दाभला, तहसील घुमारवीं, जिला बिलासपुर में हुआ। मात्र तीन दिन के थे तो उनकी माता का निधन हो गया। इसके बाद रिडकु राम निवासी ग्राम पनियाला, डाकघर कोठी, तहसील घुमारवीं ने इन्हें गोद लिया। उनके पढ़ाई दसवीं कक्षा तक हुई है।

हरिमन का कहना है कि पद्मश्री सम्मान का नाम सुन कर उनका उत्साह दो गुना हो गया है। पुरस्कार को प्रोत्साहन समझकर और काम करेंगे। सेब के साथ  वे इन दिनों एवोकाडो लगाने का काम कर रहे हैं। इस पर ओर तेजी से काम किया जाएगा, क्योंकि यह फल काफी महंगा होता है और लोगों की पहुंच से दूर है।



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