शिमला। एक तरफ जहां पूरा प्रदेश एचएमपीवी के खौफ के साए में जी रहा है। ऐसे में सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में कोरोना के दौरान प्रेशर स्विंग आडर्सेप्शन (पीएसए) प्लांट में तैनात किए गएकर्मचारियों को कार्य मुक्त कर दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि अब प्रदेश में लगाए गए इन तकनीकी कर्मचारियों का सेवाकाल का समय पूरा हो गया है। इसी वजह से इन कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के फरमान जारी कर दिए हैं।
प्रदेशभर में कोरोनाकाल में लगाए गए करोड़ों रुपये के पीएसए प्लांट में 29 कर्मचारियों को तैनात किया गया था। अब इन सभी कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के फरमान जारी होने के बाद बेरोजगारी की तलवार भी लटक गई है।
विदित रहे कि इससे पहले भी आउटसोर्स पर लगे इन कर्मचारियों को कई बार कार्यमुक्त करने के बाद फिर से तैनाती दी गई। लेकिन अभी तक इस बारे जिला स्वास्थ्य विभाग को कोई निर्देश उच्चाधिकारियों से नहीं आए हैं।
इसके बाद से इन कर्मचारियों को पीएसए प्लांट से संबंधित दस्तावेज को अस्पतालों के उच्चाधिकारियों को देने के लिए कहा है। आउसोर्स तकनीकी कर्मचारियों का 10 जनवरी तक सेवाएं लेने के लिए कहा था।
गौर रहे कि प्रदेश भर में करोड़ों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इससे सांस संबंधी मरीजों को भी सुविधा मिल रही थी। वहीं ऑक्सीजन सिलिंडरों की खपत भी अस्पतालों में प्लांट के बाद कम हो गई थी।
अब इन कर्मचारियों को निकालने के बाद प्लांट में ताला लग गया है। इस कारण अस्पतालों में मरीजों को सिलिंडर के जरिए ही ऑक्सीजन मिलेगी। इससे अस्पतालों का खर्चा ओर अधिक बढ़ जाएगा।
दूसरी ओर एचएमपीवी वायरस को लेकर भी ऑक्सीजन और अन्य चीजों की तैयारियां पूर्ण रखने के लिए कहा है। पीएसए प्लांट में तैनात कर्मचारियों का वर्ष 2023 में अप्रैल, जुलाई और फिर जनवरी 2024 में सेवा विस्तार दिया गया था।
एक वर्ष बाद अब 10 जनवरी को तकनीकी कर्मचारियों का कार्यकाल खत्म हो गया था। जिसके बाद इन्हें निकालने के आदेश भी जारी हो गए थे।


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