शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून ने भारी तबाही मचाई है। सोलंग घाटी में भूस्खलन के कारण मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-3) बंद हो गया है। मनाली डीएसपी केडी शर्मा ने बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) मलबा हटाने में जुटा है और वाहनों को रोहतांग पास से डायवर्ट किया गया है। सड़क खोलने में कुछ घंटे लग सकते हैं।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से 1 जुलाई तक भूस्खलन, बाढ़ और भारी बारिश से 51 लोगों की मौत हुई, 22 लापता हैं, और 103 घायल हुए। मंडी जिला सबसे प्रभावित है, जहां 10 मौतें और 34 लोग लापता हैं। 204 घर क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें 22 पूरी तरह नष्ट हो गए। निजी संपत्ति को 88.03 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
मंडी की सराज घाटी में बादल फटने से हालात बदतर हैं। सड़कें, पुल, बिजली, पानी और संचार व्यवस्था ठप है। 38 पंचायतें अलग-थलग हैं। लंबाथाच के निहरी में बिशन सिंह ने बताया कि भूस्खलन में उनकी साथी मजदूर सुष्मिता नाले में बह गई। घायल बिशन को ग्रामीणों ने 30 किमी पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।
थुनाग में 16 मौतें और 55 लोग लापता हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासन राहत कार्य में जुटे हैं, लेकिन सड़कों के अभाव में मदद पहुंचाना मुश्किल है। हेलिकॉप्टर से राशन पहुंचाया जा रहा है, पर प्रभावित गांवों तक पहुंच चुनौतीपूर्ण है।
मंडी की सराज घाटी में बादल फटने से हालात बदतर हैं। सड़कें, पुल, बिजली, पानी और संचार व्यवस्था ठप है। 38 पंचायतें अलग-थलग हैं। लंबाथाच के निहरी में बिशन सिंह ने बताया कि भूस्खलन में उनकी साथी मजदूर सुष्मिता नाले में बह गई। घायल बिशन को ग्रामीणों ने 30 किमी पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।
थुनाग में 16 मौतें और 55 लोग लापता हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासन राहत कार्य में जुटे हैं, लेकिन सड़कों के अभाव में मदद पहुंचाना मुश्किल है। हेलिकॉप्टर से राशन पहुंचाया जा रहा है, पर प्रभावित गांवों तक पहुंच चुनौतीपूर्ण है।


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