विकासनगर। चकराता तहसील में तैनात नेटवर्क इंजीनियर (तहसील कर्मी) ने चकराता थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर और सिपाही पर थाने में बुलाकर गाली-गलौज और पीटने का आरोप लगाया है। इंजीनियर ने इस संबंध में थाने में तहरीर दी है। उधर, सिपाही ने भी दो तहसील कर्मियों समेत तीन लोगों पर उनके निजी वाहन को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों की ओर से दी गई तहरीर पर अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।
थानाध्यक्ष चंद्रशेखर नौटियाल ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। तहसील चकराता में तैनात एक नेटवर्क इंजीनियर ने चकराता थाने में तहरीर दी है। बताया कि गुरुवार सुबह वह तहसील में काम कर रहे थे। इसी दौरान एक सिपाही, एसआई ने उसे थाने बुलाया। जहां थानाध्यक्ष की अनुपस्थिति में वह उससे वाहनों की तोड़फोड़ के बारे में पूछताछ करने लगे। आरोप लगाया कि दोनों पुलिसकर्मियों ने उनसे अभद्रता की और बुरी तरह से पीटा।
जिससे उनके शरीर पर काफी चोट के निशान भी पड़े हैं। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना मेडिकल कराकर थाना चकराता में तहरीर देते हुए दोनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। बताया कि वह तहसील के पास ही रहते हैं। वहां पर एसडीआरएफ, तहसील पुलिस और सैलानियों के वाहन भी खड़े रहते हैं। इनमें से तीन वाहनों में किसी अज्ञात व्यक्ति ने तोड़फोड़ की है।
पुलिस कर्मी उस पर तोड़फोड़ करने का आरोप लगा रहे हैं। उधर, चकराता थाने में तैनात सिपाही ने भी नेटवर्क इंजीनियर समेत तीन लोगों के विरुद्ध उनके वाहन को क्षति पहुंचाने की तहरीर देते हुए कार्रवाई की मांग की है। थानाध्यक्ष चकराता चंद्रशेखर नौटियाल ने बताया कि तहसील कर्मी और सिपाही द्वारा तहरीर दी गई है। मामले की जांच की जा रही है।
वाहनों में तोड़फोड़ से कानून व्यवस्था पर सवाल बुधवार देर रात हुई यह घटना क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। जहां पुलिसकर्मियों के वाहनों में तोड़फोड हुई वह थाने से महज 50 मीटर दूर है। लोगों का कहना है कि तहसील परिसर में खड़े पुलिसकर्मियों के वाहन ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी की सुरक्षा की क्या गारंटी है।
वहीं, तहसील परिसर में सीसीटीवी का न होना भी एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। यदि वहां सीसीटीवी लगे होते तो तोड़फोड़ करने वाले अराजक तत्व की पहचान करना आसान होता।


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