उत्तरकाशी। यमुनोत्री पैदल मार्ग पर सोमवार दोपहर नौ कैंची के पास अचानक पहाड़ दरकने से बड़ा हादसा हो गया। कई यात्री मलबे में दब गए, जिसके बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुट गईं। जानकीचट्टी चौकी प्रभारी गंभीर सिंह तोमर ने बताया कि सुरक्षा के लिए यात्रा मार्ग पर आवाजाही रोक दी गई है।
बचाव दल ने मुंबई निवासी 60 वर्षीय यात्री रसिक को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। डॉ. हरदेव सिंह पंवार ने बताया कि रसिक के सिर पर चोटें हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है। टीमें अन्य दबे हुए यात्रियों को निकालने में लगी हैं। बारिश के कारण बचाव कार्य में चुनौतियां बढ़ रही हैं। उत्तराखंड में मानसून की शुरुआत के साथ ही भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे चारधाम यात्रा प्रभावित हो रही है।
उधर, गंगोत्री हाईवे पर सुक्की के सात नाले बरसात में मुसीबत बन रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने वर्षों से इन नालों पर सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए, जिससे हर साल यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। बीआरओ से कई बार नालों के सुधारीकरण की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात में ये नाले सड़क पर मलबा और पानी लाते हैं, जिससे आवाजाही बाधित होती है।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम अलर्ट का पालन करें और यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की पुष्टि करें। मौसम विभाग ने अगले 2025 के लिए उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। यमुनोत्री और गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
यह हादसा चारधाम यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। स्थानीय प्रशासन और बीआरओ से मांग की जा रही है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं।


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