लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बुधवार को मौसम के अचानक बिगड़ने से आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक, खासकर दिल्ली से सटे जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया। आंधी और बारिश ने जहां तापमान में कमी लाकर गर्मी से राहत दी, वहीं आम की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
गोरखपुर मंडल में तीन लोगों की मौत की खबर है। गोरखपुर के रजही में वज्रपात से 19 वर्षीय धीरज मौर्या की मौत हो गई, जबकि उनकी मां कैलाशी देवी गंभीर रूप से झुलस गईं। कुशीनगर के कसया क्षेत्र में पेड़ गिरने से 14 वर्षीय कृष्णा की मौत हो गई, वहीं उसकी बहन ममता घायल है। रामकोला में बारिश से बचने के लिए झोपड़ी में छिपीं मानती देवी (46) तेज हवा के झोंके से उड़कर गिरने से मृत्यु हो गई।
निघासन क्षेत्र में आंधी से दीवार और टिनशेड गिरने से तीन लोगों की जान गई। रक्षपाल सिंह (45) और उनकी 10 वर्षीय बेटी रमनदीप की मलबे में दबकर मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी और अन्य परिजन घायल हैं। इसी क्षेत्र में 80 वर्षीय फुलवासा की टिनशेड गिरने से मृत्यु हो गई। सिर में गंभीर चोट को उनकी मौत का कारण बताया गया।
पश्चिमी यूपी में भी स्थिति गंभीर रही। गाजियाबाद में जलभराव और पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। संजयनगर में बरगद का पेड़ वाहनों पर गिरा, वहीं मधुबन बापूधाम में पेड़ गिरने से बाइक सवार की मौत हो गई। खोड़ा में स्कूल की दीवार गिरने और निडौरी में नाले में गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मेरठ, अलीगढ़, सोनभद्र, और झांसी में भी वज्रपात और लू से कई मौतें हुईं। बिजनौर में पेड़ गिरने से एक सिपाही की जान गई।
आंधी-तूफान ने सड़कों पर पेड़ और टहनियां गिरने से कई जगह रास्ते अवरुद्ध हो गए। शहरों में जलभराव की समस्या ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाईं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन इस आपदा ने एक बार फिर मौसम की अनिश्चितता को उजागर किया है।


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