अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में बंदरों की बढ़ती समस्या और प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे और रामशिला वार्ड के पार्षद नवीन चंद्र आर्य ने जिलाधिकारी आलोक कुमार पाण्डे से मुलाकात कर कड़ा रुख अपनाया। दोनों ने 11 अप्रैल 2025 को सौंपे गए ज्ञापन पर कोई कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी जताई और अधिकारियों के अमर्यादित व्यवहार पर सवाल उठाए।
पाण्डे और आर्य ने बताया कि 11 अप्रैल को बंदरों की समस्या और जनसुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर वे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। जिलाधिकारी के अवकाश पर होने के कारण अपर जिलाधिकारी (ए.डी.एम.) से मुलाकात हुई, जिन्होंने कथित तौर पर असम्मानजनक लहजे में कहा, "तो बोलिए, क्या बोलना है? हमारे पास समय नहीं है।" इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी (सी.डी.ओ.) से मिलने की कोशिश नाकाम रही, क्योंकि 15 मिनट इंतजार के बाद भी ज्ञापन स्वीकार नहीं किया गया।
पार्षद आर्य ने जिलाधिकारी से कहा कि प्रशासन को सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनैतिक व्यक्तियों के बीच अंतर समझना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, "सामाजिक कार्यकर्ता निस्वार्थ भाव से जनहित में काम करते हैं। उन्हें नियमों की आड़ में मिलने से वंचित करना गलत है। जैसे राजनैतिक प्रतिनिधियों को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मान और महत्व मिलना चाहिए।"
संजय पाण्डे ने प्रशासन की उदासीनता पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, "एक महीने तक ज्ञापन पर कोई कार्रवाई न होना दर्शाता है कि प्रशासन आम जनता की समस्याओं के प्रति कितना असंवेदनशील है। यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।"
प्रतिनिधियों ने प्रमुख मांगें रखीं: 11 अप्रैल के ज्ञापन पर त्वरित कार्रवाई, अधिकारियों के अमर्यादित व्यवहार पर चेतावनी, संवाद मर्यादा गाइडलाइन लागू करने, और बंदरों की समस्या के स्थायी समाधान हेतु कार्ययोजना बनाने की मांग शामिल है।
पाण्डे ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला मुख्यमंत्री, राज्यपाल और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों तक ले जाया जाएगा। यह मुलाकात प्रशासन के लिए जनहित को गंभीरता से लेने का स्पष्ट संदेश है।


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