सोलन। हिमाचल प्रदेश प्रवक्ता संघ ने प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में लागू ड्रेस कोड की व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। संघ के जिला प्रधान जयलाल जलपाइक और महासचिव हेमंत कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षा सचिव के आदेश के अनुसार, जीन्स, टी-शर्ट और भड़कीले कपड़े पहनना अशैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। आदेश में महिला शिक्षकों के लिए दुपट्टे के साथ सलवार-कमीज या औपचारिक पश्चिमी परिधान और पुरुष शिक्षकों के लिए औपचारिक पोशाक की सिफारिश की गई है। विद्यालयों को स्थानीय परिस्थितियों और मौसम के अनुसार ड्रेस कोड को अनुकूलित करने की छूट दी गई है। संघ ने इस आदेश का स्वागत किया और आश्वस्त किया कि प्रवक्ता इसका पालन करेंगे।
हालांकि, संघ ने कुछ स्कूलों में प्रिंसिपल द्वारा ड्रेस कोड के नाम पर शिक्षकों को जबरन वर्दी पहनने के लिए मजबूर करने की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की। जयलाल जलपाइक ने कहा कि जिला के कई स्कूलों से शिकायतें मिल रही हैं, जहां प्रिंसिपल शिक्षकों को वर्दी पहनने के लिए कार्यालय आदेश जारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे ड्रेस कोड की गलत व्याख्या करार देते हुए कहा कि यह शिक्षकों के आत्मसम्मान के खिलाफ है। संघ ने स्पष्ट किया कि ड्रेस कोड का मतलब औपचारिक पोशाक है, न कि एकसमान वर्दी। हेमंत कुमार शर्मा ने कहा कि प्रिंसिपल, जो स्वयं शिक्षित हैं, को इस आदेश को सही ढंग से लागू करना चाहिए।
संघ ने चेतावनी दी कि ऐसे प्रिंसिपल के खिलाफ शिक्षा सचिव को शिकायत की जाएगी। साथ ही, संघ जल्द ही जिला शिक्षा उपनिदेशक जयपाल सिंह चौहान से मुलाकात कर मांग करेगा कि प्रिंसिपल को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि शिक्षकों को केवल औपचारिक परिधान पहनने के लिए कहा जाए, न कि वर्दी। प्रवक्ता संघ ने शिक्षकों से अपील की कि वे ड्रेस कोड का पालन करें, लेकिन वर्दी थोपने के किसी भी प्रयास का विरोध करें। इस मुद्दे पर संघ शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है और इसे लेकर प्रशासन से सख्ती से बात करेगा।


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