हल्द्वानी। नैनीताल जिले में नकली सोना गिरवी रखकर बैंकों से गोल्ड लोन लेने वाले एक संगठित गिरोह का नैनीताल पुलिस ने पर्दाफाश किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रहलाद नारायण मीणा के नेतृत्व में हल्द्वानी पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों, अखिलेश सिंह नेगी (37 वर्ष) और पवन सिंह फर्सवाण (24 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जनपद के हल्द्वानी, बनभूलपुरा और मुखानी क्षेत्रों में बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक में नकली सोना गिरवी रखकर लोन लेने की शिकायतों के बाद की गई।
नैनीताल जिले के एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने हल्द्वानी में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में खुलसा किया कि वर्ष 2024-25 में इन बैंकों में गिरवी रखे गए आभूषणों की ऑडिट के दौरान नकली होने की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद थाना हल्द्वानी, बनभूलपुरा और मुखानी में छह मुकदमे दर्ज किए गए। इन मामलों में अजहर वारसी, जोया अहमद, तरुण भारद्वाज, हरजिंदर नरुला और मोहम्मद फिरोज नामजद हैं। एसएसपी मीणा ने पुलिस अधीक्षक (नगर) प्रकाश चंद्र और पुलिस उपाधीक्षक नितिन लोहनी को थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम गठित कर इस गिरोह का खुलासा करने का निर्देश दिया।
28 मई 2025 को मुखबिर की सूचना के आधार पर प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार यादव के नेतृत्व में पुलिस ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय पार्क, नैनीताल रोड से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 111 ग्राम वजन की आठ नकली सोने की चूड़ियां बरामद की गईं, जिन पर कूट रचित होलोग्राम अंकित था। परीक्षण में इन चूड़ियों के नकली होने की पुष्टि हुई। आरोपियों के खिलाफ थाना हल्द्वानी में मुकदमा संख्या 165/25, धारा 318(3)/338/336(3)/340(2/3)(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की जा रही है। दोनों को माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पूछताछ में अखिलेश और पवन ने खुलासा किया कि उनका गिरोह अल्मोड़ा और दिल्ली के कुछ लोगों के साथ मिलकर काम करता है। वे दिल्ली से सस्ते दामों में नकली सोना खरीदते हैं और उस पर फर्जी होलमार्क लगवाकर बैंकों में गिरवी रखते हैं। वे ऐसी बैंकों को निशाना बनाते हैं, जो सोने की गहन जांच नहीं करते। लोन की राशि को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते हैं। अखिलेश ने स्वीकार किया कि उसने विभिन्न बैंकों से 60-70 लाख रुपये के प्रॉपर्टी, वाहन और गोल्ड लोन लिए हैं। पुलिस इसकी विस्तृत जांच कर रही है।
पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या बैंकों की क्वालिटी जांच प्रक्रिया में कमी थी या इसमें किसी कर्मचारी की मिलीभगत थी। पूर्व में दर्ज छह मुकदमों में नामजद अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस सफलता के लिए एसएसपी ने पुलिस टीम को 2,500 रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है। जांच अभी जारी है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके और ऐसी धोखाधड़ी को रोका जा सके।



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