नालागढ़। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन), जो कभी फार्मा हब के रूप में विश्व भर में मशहूर था, आज वायु और ध्वनि प्रदूषण की मार झेल रहा है। 2003 के औद्योगिक पैकेज के बाद इस क्षेत्र में 1900 से ज्यादा उद्योग स्थापित हुए, लेकिन इनके जहरीले धुएं और तेज शोर ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सरसा नदी और नाले कैमिकल युक्त पानी से जहरीले हो गए हैं, जिससे फसलें नष्ट हो रही हैं, मवेशी मर रहे हैं, और मछलियों का जीवन संकट में है।
वायु प्रदूषण के कारण कैंसर, सांस की बीमारियां और त्वचा रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। उद्योगों और ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं लोगों का दम घोंट रहा है। वहीं, ध्वनि प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों में तनाव, नींद की कमी और सुनने की समस्याएं बढ़ गई हैं। सैकड़ों लोग गंभीर बीमारियों से अपनी जान गंवा चुके हैं।
रोड सेफ्टी क्लब के उपाध्यक्ष पिंकी राणा और सामाजिक कार्यकर्ता सुदर्शन ने आरोप लगाया कि उद्योग अपने ईटीपी प्लांट नहीं चलाते और प्रदूषित पानी सीधे नदियों में बहा देते हैं। लोगों ने कई बार प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद कुछ उद्योग बंद हुए, लेकिन समस्या बरकरार है। पर्यावरणविद् चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह क्षेत्र स्वास्थ्य संकट का बड़ा केंद्र बन जाएगा।
सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चुप्पी से नाराज स्थानीय लोग अब न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।


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