देहरादून। शिक्षा विभाग ने अमान्य प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्त एक अशासकीय विद्यालय के चार शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनमें प्रधानाध्यापक अजय सिंह सहित सहायक अध्यापक कौशलेंद्र, नीलम और सुनीता शामिल हैं। यह कार्रवाई डोईवाला विकासखंड के हर्रावाला क्षेत्र में स्थित सावित्री शिक्षा निकेतन जूनियर हाईस्कूल में की गई, जहां कक्षा 10 तक की पढ़ाई होती है, लेकिन कक्षा छह से आठ तक ही विद्यालय को वित्तीय सहायता प्राप्त है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों को लेकर पहली शिकायत 2017 में विशेष जांच दल (एसआईटी) से मिली थी। लंबे समय तक विद्यालय प्रबंधन द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर विभाग ने तत्कालीन अपर निदेशक प्राथमिक शिक्षा गढ़वाल को विद्यालय का प्रशासक नियुक्त किया। इसके बाद चारों शिक्षकों को निलंबित कर खंड शिक्षाधिकारी रायपुर कार्यालय से संबद्ध किया गया और विभागीय जांच शुरू की गई।
हालांकि, अजय सिंह, सुनीता और नीलम ने हाईकोर्ट से निलंबन पर स्टे आर्डर प्राप्त कर विद्यालय में वापसी कर ली थी, लेकिन जांच जारी रही। जांच में अजय सिंह, नीलम और सुनीता की बीएड डिग्री अमान्य पाई गई, जबकि कौशलेंद्र की नियुक्ति बीपीएड डिग्री के आधार पर हुई थी। विभाग ने स्पष्ट किया कि जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक नियुक्ति के लिए बीएड या बीटीसी डिग्री अनिवार्य है, और बीपीएड डिग्री मान्य नहीं है।
जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) पीएल भारती के अनुमोदन से डोईवाला खंड शिक्षा अधिकारी ने चारों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया। पीएल भारती ने बताया कि विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए समीपवर्ती दो विद्यालयों से एक-एक शिक्षक को अस्थायी तौर पर तैनात किया गया है। विद्यालय में कक्षा छह से आठ तक लगभग 60 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा, "विभागीय जांच में शिक्षकों की नियुक्ति अमान्य प्रमाणपत्रों पर आधारित होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।"


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