केंद्र की औद्योगिक योजना में ठगे गए हिमाचल-उत्तराखंड के उद्योगपति, पोर्टल बंद होने से रोष - सत्यमेव जयते

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Thursday, April 3, 2025

केंद्र की औद्योगिक योजना में ठगे गए हिमाचल-उत्तराखंड के उद्योगपति, पोर्टल बंद होने से रोष


नालागढ़। केंद्र सरकार द्वारा पहाड़ी राज्यों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 2017 में शुरू की गई इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम (आईडीएस) अब उद्योगपतियों के लिए सिरदर्द बन गई है। इस योजना के तहत उद्योगपतियों को लुभाने के लिए सरकार ने वादा किया था कि पोर्टल पर पंजीकरण करने वाले उद्योगों को 30% सब्सिडी दी जाएगी। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 1500 से अधिक उद्योगपतियों ने 2017 से 31 मार्च 2022 तक इस पोर्टल पर अपने उद्योगों का पंजीकरण कराया, लेकिन अब यह पोर्टल काम नहीं कर रहा है। लॉगिन करने की कोशिश करने पर एरर दिखाई देता है, जिससे उद्योगपतियों में गहरा असंतोष फैल गया है।

उद्योगपतियों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 30% सब्सिडी का झांसा देकर उनसे पंजीकरण करवाया और अब पोर्टल को बंद कर दिया गया है। इससे कई उद्योग एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग असेट) की कगार पर पहुंच गए हैं और उन्हें करोड़ों रुपये के नुकसान का डर सता रहा है। प्रभावित उद्योगपतियों ने सरकार से पोर्टल को दोबारा शुरू करने और वादे के मुताबिक सब्सिडी देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे कोर्ट का रुख करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

हिमाचल प्रदेश लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष हरबंस पटियाल ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार ने इस स्कीम को बड़े जोर-शोर से शुरू किया था और उद्योगपतियों को आश्वासन दिया था कि 31 मार्च 2022 तक पंजीकरण करने वालों को 30% सब्सिडी मिलेगी। लेकिन अब पोर्टल न तो खुल रहा है और न ही लॉगिन हो रहा है। उन्होंने बताया कि हिमाचल और उत्तराखंड के करीब 1500 उद्योगपतियों ने इस योजना पर भरोसा किया, लेकिन सरकार ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया। पटियाल ने कहा कि इससे उद्योगपतियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और कई उद्योग बंद होने के कगार पर हैं।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ठाकुर से मांग की कि वे केंद्र सरकार से इस स्कीम के तहत उद्योगपतियों को लाभ दिलाने के लिए पहल करें। पटियाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही वादे पूरे नहीं किए, तो 1500 से अधिक उद्योगपति सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार की इस लापरवाही से न केवल उनका भरोसा टूटा है, बल्कि पहाड़ी राज्यों में औद्योगिक विकास की उम्मीदें भी धूमिल हो रही हैं।


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