शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने जीरो एनरोलमेंट वाले सात कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया है। इनमें ज्यूरी, पवाबो, बसदेहड़ा, काजा, टौणीदेवी और गलोड कॉलेज शामिल हैं, जो कई वर्षों से गैर-कार्यात्मक थे। जिला शिमला निवासी मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हुई बैठक में यह निर्देश जारी किए। साथ ही, 10 से कम छात्रों वाले वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों और 100 से कम छात्रों वाले कॉलेजों को मर्ज करने का निर्णय लिया गया।
सरकार का कहना है कि यह कदम संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। जिन कॉलेजों में कोई छात्र नामांकन नहीं कर रहा, उन्हें चलाना व्यावहारिक नहीं है। मर्ज करने की प्रक्रिया अगले माह से शुरू होगी, क्योंकि वर्तमान में कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षाओं के समापन के बाद यह कार्य तेजी से लागू किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में समायोजित किया जाएगा, ताकि शिक्षकों और बुनियादी ढांचे का समुचित उपयोग हो सके। सरकार का लक्ष्य है कि शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए। इन कॉलेजों और स्कूलों के कर्मचारियों और छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ असंतोष की आशंका है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय दीर्घकालिक लाभ के लिए है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों से सहयोग की अपील की गई है। शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मर्जिंग और बंद करने की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरी की जाए।


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