उत्तराखंड : अब बज सकता है पंचायत चुनावों का बिगुल, मई में मतदान, अप्रैल में अधिसूचना की संभावना - सत्यमेव जयते

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Tuesday, April 1, 2025

उत्तराखंड : अब बज सकता है पंचायत चुनावों का बिगुल, मई में मतदान, अप्रैल में अधिसूचना की संभावना


देहरादून। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है, और सूबे की सियासत में एक नई हलचल शुरू हो गई है। हरिद्वार जिले को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। सूत्रों की मानें तो मई 2025 के दूसरे सप्ताह यानी 8 से 10 मई के बीच इन महत्वपूर्ण चुनावों का आयोजन हो सकता है। इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना अप्रैल 2025 के तीसरे सप्ताह (17 से 20 अप्रैल) में जारी होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक मशीनरी भी इस बड़े लोकतांत्रिक आयोजन के लिए कमर कस चुकी है। 

विभागीय सूत्रों ने खुलासा किया है कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया था। इन प्रशासकों का कार्यकाल जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए 1 जून 2025 और ग्राम प्रधानों के लिए 10 जून 2025 को समाप्त हो रहा है। नियमों के मुताबिक, इस कार्यकाल को आगे बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके चलते सरकार और प्रशासन पर समय से चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि अगर तय समय पर चुनाव नहीं हुए, तो ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। 

चुनाव की तैयारियां तेज, बैठक में होगा अंतिम फैसला

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना अप्रैल के मध्य से लेकर तीसरे सप्ताह के अंत तक जारी हो सकती है। इसके बाद मई के पहले पखवाड़े में मतदान की प्रक्रिया पूरी करने की योजना है। सूत्रों का दावा है कि विभाग जल्द ही एक हाई-लेवल बैठक आयोजित करने जा रहा है, जिसमें चुनाव की तारीखों, प्रक्रिया और तैयारियों पर अंतिम मुहर लग सकती है। इस बैठक को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

आरक्षण की प्रक्रिया अधूरी, संशय बरकरार

हालांकि, इन तैयारियों के बीच एक बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी है। पंचायतों में आरक्षण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जिसके कारण चुनावी तैयारियों पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर आरक्षण की प्रक्रिया में देरी हुई, तो अधिसूचना और मतदान की तारीखों में बदलाव भी संभव है। फिर भी, विभागीय सूत्रों का दावा है कि सरकार और प्रशासन इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हर हाल में समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

ग्रामीण सत्ता की जंग का होगा आगाज

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में सत्ता की इस जंग का असर न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य की राजनीति पर भी गहरा पड़ने वाला है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न केवल ग्रामीण विकास की दिशा तय करेंगे, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए भी एक बड़ा इम्तिहान साबित होंगे। जैसे-जैसे अधिसूचना की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। अब देखना यह है कि क्या तय समय पर यह चुनावी महासंग्राम शुरू हो पाएगा, या आरक्षण जैसे मुद्दे इसमें रोड़ा अटकाएंगे।


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