नालागढ़। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ में एक और दवा फैक्ट्री पर ताला लग गया है। भारतगढ़ मार्ग के भाटियां में स्थित अफाइन दवा कंपनी के मालिक ने रातोंरात फैक्ट्री बंद कर दी और फरार हो गए। नतीजतन, 100 से ज्यादा मजदूर बेरोजगार हो गए। अब इनकी जिंदगी संकट में है—बच्चों की स्कूल फीस जमा न होने से फाइनल एग्जाम में बैठने की इजाजत नहीं मिल रही, और घर चलाने की चिंता सिर पर सवार है।
सोमवार सुबह कंपनी के गेट पर मजदूरों ने अपने बच्चों के साथ धरना दिया। विजय कुमार मिश्रा, सुरेंद्र सिंह, कैलाश शर्मा, राकेश कुमार, धर्मपाल सहित 21 अन्य मजदूरों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि महीनों से वेतन नहीं मिला, PF और ESI काटा गया पर उसका लाभ नहीं दिया गया। मजदूरों का कहना है, "मालिक गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। जबरन रिजाइन देने का दबाव डाला जा रहा है। कुछ से तो इस्तीफा ले भी लिया गया। जो रोज आ रहे हैं, उन्हें भी धमकाया जा रहा है।"
मजदूरों ने दो टूक कहा, "हमें हमारा पूरा हिसाब दो, हम अपने घर चले जाएंगे।" उनका दावा है कि कंपनी ने 10-12 साल तक मोटा मुनाफा कमाया, करोड़ों की कमाई की, लेकिन अब इसे बेचने की तैयारी है। यहाँ तक कि प्रॉपर्टी डीलर भी फैक्ट्री देखने आ रहे हैं। मजदूरों ने सरकार और प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग की है ताकि प्रबंधन पर कार्रवाई हो और उनका बकाया मिले।
जब हमने कंपनी मालिक मनोज से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका फोन बंद मिला। मजदूरों का कहना है कि वे पिछले 8 महीने से फैक्ट्री में दिखे भी नहीं। इस बीच, मजदूरों की जिंदगी पटरी से उतर चुकी है, और प्रशासन की चुप्पी उनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है। क्या इन मजदूरों को उनका हक मिलेगा, या यह कहानी भी अनसुलझी रह जाएगी?


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