नालागढ़। गर्मियों की तपिश के साथ पानी की किल्लत ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। वार्ड नंबर 4 और 8 के निवासियों के लिए नगर परिषद ने गबला कुआँ से पानी की स्कीम शुरू की थी, जिसके तहत कुएँ में मोटर लगाई गई और दुर्गा मंदिर परिसर में पाँच पानी की टंकियाँ स्थापित की गईं। लाखों रुपये की लागत से पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन डेढ़ साल बाद भी यह योजना कागजों से धरातल पर नहीं उतर पाई। घरों के बाहर लगे नल आज भी पानी की एक बूंद को तरस रहे हैं। गर्मियों में जलस्तर घटने से सिंचाई एवं जल शक्ति विभाग (आईपीएच) की पानी आपूर्ति नाक साबित हो रही है, जिसके चलते यह स्कीम लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनी थी। लेकिन, अधूरी व्यवस्था ने निवासियों को निराशा के गर्त में धकेल दिया है।
स्थानीय निवासी राजीव कुमार का कहना है, "पिछली गर्मियाँ भी बिना पानी के बीत गईं। अब दूसरी गर्मियाँ आ गईं, लेकिन नल सूखे हैं। नगर परिषद के वादे बस हवा में उड़ रहे हैं।" शहरवासियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, क्योंकि 'हर घर जल, हर घर नल' का नारा उनकी उम्मीदों पर भारी पड़ रहा है। लोग सुबह-शाम पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
नगर परिषद की अध्यक्ष वंदना बंसल ने सफाई देते हुए कहा, "कुछ तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई है। हमने 70 कनेक्शनों का काम शुरू कर दिया है और इस हफ्ते पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।" लेकिन, डेढ़ साल की देरी और बार-बार टूटते वादों ने लोगों का भरोसा डगमगा दिया है। निवासियों का सवाल है कि जब इतना समय और पैसा खर्च हो चुका है, तो आखिर कमी कहाँ रह गई? क्या तकनीकी खामियाँ ही देरी का एकमात्र कारण हैं, या यह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है?
पिछले साल की गर्मियों में भी यही आश्वासन दिए गए थे, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। अब जबकि गर्मी अपने चरम पर है, लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। यह देखना बाकी है कि नगर परिषद का ताजा वादा कितना रंग लाता है और क्या इस बार नालागढ़ के लोग पानी की समस्या से निजात पा सकेंगे। फिलहाल, शहरवासियों की नजरें नगर परिषद पर टिकी हैं, और वे उम्मीद कर रहे हैं कि यह स्कीम जल्द ही धरातल पर उतरेगी, ताकि उनके घरों में नल से पानी की धार बहे और 'हर घर जल' का सपना हकीकत बन सके।


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