‘जीपीएस स्पूफिंग’ एक साइबर हमला है, जिसमें विमान के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह करने के लिए फर्जी सिग्नल भेजे जाते हैं, जो विमान की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि मांडले इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने पहले ही ‘नोटम’ (नोटिस टू एयरमैन) जारी कर जीपीएस की संभावित अनुपलब्धता की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद, चालक दल ने बैकअप सिस्टम का उपयोग कर मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सूत्रों के अनुसार, 29 मार्च को सी-130जे विमान सहित छह सैन्य विमानों ने म्यांमार में राहत सामग्री और बचाव दल पहुंचाया था। इनमें से अधिकांश विमानों को म्यांमार के हवाई क्षेत्र में जीपीएस सिग्नल के साथ छेड़छाड़ का सामना करना पड़ा। इससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं, लेकिन पायलटों ने वैकल्पिक सिस्टम का उपयोग कर स्थिति को संभाला।
इस घटना ने सवाल उठाए हैं कि राहत मिशन के दौरान जीपीएस स्पूफिंग का शिकार बनाने वाला कौन हो सकता है। म्यांमार में चीन की रणनीतिक उपस्थिति और वहां सक्रिय विद्रोही संगठनों की गतिविधियां इस संदर्भ में चर्चा का विषय हैं। गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर भी ऐसी घटनाएं आम हैं, जहां नवंबर 2023 से अब तक अमृतसर और जम्मू के पास 465 मामले दर्ज किए गए हैं।
भारत ने म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया था। इस भूकंप में 3,649 लोगों की मौत हुई और 5,000 से अधिक घायल हुए थे। भारतीय वायुसेना की त्वरित कार्रवाई और चालक दल की कुशलता ने राहत कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया।


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