सोलन। कोठों के एकीकृत मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पुनर्वास केंद्र (आईएमडीआरसी), मानव मंदिर में रविवार को मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और संबंधित आनुवंशिक विकारों पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित हुई। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (आईएएमडी) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
आईएएमडी की अध्यक्ष संजना गोयल ने बताया कि कार्यशाला का लक्ष्य मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित बच्चों के पोषण, जीवनशैली और समग्र प्रबंधन पर चर्चा करना था। इसमें उपचार में आधुनिक प्रगति, जीएनई मायोपैथी की नई तकनीकें, नवीन शोध, दुर्लभ रोगों के लिए सरकारी प्रयास और पुनर्वास रणनीतियों पर गहन विमर्श हुआ। परिवार और समुदाय की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में आईसीएमआर की डॉ. रुचि सिंह और एम्स दिल्ली की प्रो. डॉ. शैफाली गुलाटी ने ऑनलाइन हिस्सा लिया। इसके अलावा, सीडीएफडी हैदराबाद के डॉ. अश्विन दलाल, एम्स बिलासपुर के डॉ. आशीष शर्मा, पीजीआई चंडीगढ़ की डॉ. रेणु सुथर, एम्स जोधपुर के डॉ. लोकेश सैनी, एम्स भोपाल की डॉ. अनुराधा दिवाकर शिनॉय, सीएचजी बेंगलुरु के डॉ. संजीव जीएन, सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. समीर भाटिया, एम्स दिल्ली के डॉ. गौतम कामिला, स्वावलंबन फाउंडेशन राजस्थान के डॉ. वैभव भंडारी और भरथ एमडी फाउंडेशन हैदराबाद के मुरली चेतलपल्ली सहित कई विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए।
यह आयोजन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के प्रबंधन और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा।
आईएएमडी की अध्यक्ष संजना गोयल ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित बच्चों के खान-पान एवं रहन-सहन को बेहतर बनाने एवं अन्य सम्बद्ध विषयों पर सारगर्भित चर्चा करना था। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के उपचार में आधुनिक प्रगति, जी.एन.ई. मायोपैथी के उपचार में नई तकनीक, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के उपचार में नवीन अनुसंधान, दुर्लभ रोगों के विषय में सरकार के अभिनव प्रयास सहित अन्य विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
संजना गोयल ने कहा कि कार्यशाला में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रोग के समग्र प्रबंधन तथा इस रोग के उपचार में परिवार तथा समुदाय के सहयोग के सम्बन्ध में गहनता से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में इस रोग से पीड़ितों के पुनर्वास पर चिकित्सीय रणनीति भी तैयार की गई।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इस कार्यशाला में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, दिल्ली, भोपाल, बिलासपुर तथा जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान चण्डीगढ़, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान कोलकात्ता, सर गंगा राम अस्पताल नई दिल्ली, जी.एच.जी. बैंगलूरू, ग्रो लैब तथा आशिका विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यशाला में आई.सी.एम.आर. की डॉ. रुचि सिंह और एम्स नई दिल्ली की प्रो. डॉ. शैफाली गुलाटी ने ऑनलाईन भाग लिया। सी.डी.एफ.डी. हैदराबाद डॉ. अश्विन दलाल, एम्स बिलासपुर के डॉ. आशीष शर्मा, पी.जी.आई. चण्डीगढ़ की डॉ. रेणु सुथर, एम्स जोधपुर के डॉ. लोकेश सेणी, एम्स भोपाल की डॉ. अनुराधा दिवाकर शिनॉय, सी.एच.जी. बैंगलूरू के डॉ. संजीवा जी.एन., सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. समीर भाटिया, एम्स दिल्ली के डॉ. गौतम कामिला, स्वावलम्बन फाउंडेशन राजस्थान डॉ. वैभव भण्डारी और भरथ एम.डी. फाउंडेशन हैदराबाद के मुरली चेतलपल्ली सहित अन्य विशेषज्ञों ने विषयवार जानकारी प्रस्तुत की।




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