नालागढ़। नालागढ़ उपमंडल के राम शहर मार्ग पर स्थित बनसाई गांव में पेयजल संकट ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। गर्मी की तपिश में पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को 3 किलोमीटर दूर बोडी गांव से पानी लाना पड़ रहा है। सुबह 4 बजे से ही ग्रामीण पानी की जुगत में जुट जाते हैं, लेकिन बॉडी में भी पानी की कमी के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव के मात्र 6-7 परिवारों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है, और जंगल में बसी इस बस्ती में सरकारी जमीन पर पानी का टैंक बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने टैंक निर्माण के लिए कई बार बजट स्वीकृत किया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय निवासियों ने जल शक्ति विभाग और सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने ग्राम प्रधान से भी इस मुद्दे पर बात की थी, जिन्होंने टैंक निर्माण के लिए बजट आने की बात कही थी, लेकिन कार्य शुरू नहीं हुआ।
गांव की एक महिला ने बताया, "हमें रोज सुबह पानी लाने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। गर्मी में यह और मुश्किल हो गया है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं।" एक अन्य ग्रामीण ने कहा, "हमने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है। अब हमारा सब्र टूट रहा है।"
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की उदासीनता के कारण उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने जल शक्ति विभाग को दो टूक शब्दों में अपनी चेतावनी सरकार तक पहुंचाई है, जिसमें साफ कहा गया है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और जल शक्ति विभाग की होगी।"स्थानीय लोगों का गुस्सा अब उबाल पर है। बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी ढोने में व्यस्त रहते हैं, तो बुजुर्गों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। गांव की महिलाएं, जो इस संकट की सबसे बड़ी भुक्तभोगी हैं, अब खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं। उनकी मांग है कि सरकार न केवल टैंक बनाए, बल्कि नियमित जलापूर्ति भी सुनिश्चित करे।
बनसाई गांव का पेयजल संकट अब केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता और लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों की चेतावनी साफ है- अगर उनकी पुकार अनसुनी रही, तो सड़कों पर प्रदर्शन तय है। सरकार और जल शक्ति विभाग के पास अब ज्यादा समय नहीं है। यह वक्त है कि वे ग्रामीणों के दुख को समझें और उनकी बुनियादी जरूरत को प्राथमिकता दें, वरना यह संकट और बड़ा रूप ले सकता है।


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