बद्दी। बद्दी औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत झाड़माजरी में स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। इस दुखद घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, लेकिन झाड़माजरी के निवासियों ने एकजुट होकर न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि आतंकवाद और उसके प्रायोजकों के खिलाफ जमकर आक्रोश भी व्यक्त किया। इस अवसर पर लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।
झाड़माजरी में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों स्थानीय लोग, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। इस सभा का आयोजन स्थानीय व्यापारी संघ और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से किया। सभा में उपस्थित लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाते हुए पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। “आतंकवाद मुर्दाबाद” और “भारत माता की जय” जैसे नारे पूरे क्षेत्र में गूंजे, जिससे समुदाय का गुस्सा और देशभक्ति का जज्बा स्पष्ट झलक रहा था।
स्थानीय व्यापारी बलवीर ने कहा जो इस सभा के प्रमुख आयोजकों में से एक थे, ने भावुक होकर कहा, “यह हमला सिर्फ पहलगाम पर नहीं, बल्कि पूरे देश की आत्मा पर हमला है। हम उन सभी परिवारों के साथ खड़े हैं, जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोया।” उन्होंने केंद्र सरकार से आतंकवाद के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की अपील की और कहा, “ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी निर्दोष भारतीय ऐसी त्रासदी का शिकार न बने।”
सभा में शामिल लोगों ने न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि आतंकवाद के प्रायोजकों, विशेष रूप से पाकिस्तान, के खिलाफ अपना गुस्सा भी व्यक्त किया। स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा, “पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद ने हमारे देश को बार-बार निशाना बनाया है। यह समय है कि हम एकजुट होकर इस बुराई के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ें।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्थानीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ जंग में हर तरह से योगदान देने को तैयार है।
इस सभा में ठाकुर ने केंद्र सरकार से आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न केवल सैन्य कार्रवाई, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रायोजकों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को और मजबूती से उठाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी मांग की कि पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक और भावनात्मक सहायता प्रदान की जाए। “जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह दुख असहनीय है। सरकार को इन परिवारों के पुनर्वास और सहायता के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।





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