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| हल्द्वानी की गार्गी नदी में डुबकी लगा कर मंत्री के इस्तीफे की मनोकामना मांगते यूकेडी नेता |
देहरादून/हल्द्वानी। प्रदेश के बहुचर्चित कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के पद से इस्तीफे के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। उनसे इस्तीफे की मांग पर अड़े लोगों ने इस पर संतोष जताया है तो उनके समर्थन में खड़े मैदानी क्षेत्र के लोगों के समूह अब सरकार पर इस्तीफा स्वीकार न करने के लिए दवाब बनाने की तैयारी में जुट गया है।
जिस वक्त आज सुबह मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर बाए गए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के शहीद स्मारक पर सपत्नीक शीश वा रहे थे ठीक उसी समय हल्द्वानी में यूकेडी से जुड़े नेता ने रानीबाग की गार्गी नदी में उनके इस्तीफे की कामना के साथ डुबकी लगा रहे थे। इसके बाद प्रेम अग्रवाल ने देहरादून पहुंच कर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उधर यूकेडी के नेताओं ने आनन फानन में इसे रानीबाग की गंगा यानी गार्गी मैया को संकल्प पूरा करने के लिए आभार जताया।
इसके उल्टे प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद अब मैदानी क्षेत्र के लोग हुए एकजुट होने लगे हैं। देहरादून और ऋषिकेश में उनके आवास पर उनके समर्थकों का जमावड़ा लगने लगा है। सर्व समाज मैदानी मंच के लोगों ने किया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया है कि वे प्रेम अग्रवाल के इस्तीफे को स्वीकार न करें। संगठन ने मंत्री के इस्तीफे के खिलाफ कल राजधानी देहरादून में आंदोलन करने का ऐलान भी कर दिया है।
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| इस्तीफे के खिलाफ नारेबाजी करते सर्व समाज मैदानी मंच के कार्यकर्ता |
उनका कहना है कि अगर मुख्यमंत्री ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया था घंटाघर सहित शहर को बंद कराया जाएगा। प्रदेश के अन्य हिस्सों से इस घटनाक्रम पर इसी तरह की मिली जुली प्रतिक्रियाएं आ रही है।
कुल मिला कर पुष्कर सिंह धामी के लिए आने वाले दिन और तनाव देने वाले होने जा रहे हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि अग्रवाल ने इस्तीफा किस पद से दिया है। वे आरोपों से इतने आहत थे तो विधायक बने रहने के विषय कैसे सोच सकते हैं। संभव है कि प्रेम अग्रवाल ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया हो।
कौन हैं प्रेमचंद अग्रवाल?
प्रेमचंद्र अग्रवाल उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख नेता हैं। उनका राजनीतिक जीवन काफी लंबा और सक्रिय रहा है। प्रेमचंद्र अग्रवाल का जन्म देहरादून जिले के डोईवाला में एक संघी पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था। वह एक मेधावी छात्र थे और उन्होंने खेलों में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें वॉलीबॉल का अच्छा खिलाड़ी माना जाता था। उन्होंने एमकॉम और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 1980 में, वह डोईवाला में एबीवीपी के अध्यक्ष बने। 1995 में, वह देहरादून जिले में भाजपा के प्रमुख बने। वह उत्तराखंड आंदोलन में भी सक्रिय रहे। 2007 में, वह पहली बार ऋषिकेश से भाजपा विधायक चुने गए। उन्हें सरकार में संसदीय सचिव भी बनाया गया। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के चुनावों में भी ऋषिकेश सीट से जीत हासिल की। वह उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वो उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
क्या था विवादित बयान?
पहले यह समझते हैं कि हालिया बयान में ऐसा क्या था जिसके चलते विवाद मचा। दरअसल पिछले महीने यानी फरवरी में बजट सत्र के दौरान, विपक्ष के विधायकों के साथ बहस में प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि क्या यह राज्य पहाड़ियों के लिए बनाया गया है? इतना बोलते ही आक्रोश फैल गया। हर ओर से उनके इस्तीफ की मांग होने लगी। आज उन्होंने इस्तीफे की घोषणा करते हुए भावुक होकर कहा कि उन्हें यह साबित करना पड़ रहा है कि उन्होंने भी राज्य के लिए योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है उससे बहुत आहत हूं, इसलिए मुझे इस्तीफा देना पड़ रहा है।
विवादों से रहा नाता
उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। लगभग दो साल पहले उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वीडियो में मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल सड़क पर एक युवक के साथ हाथापाई कर रहे थे। वीडियो में मंत्री और युवक के बीच तीखी बहस हुई जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई। युवक ने आरोप लगाया है कि मंत्री ने उसे थप्पड़ मारा। हालांकि,मंत्री ने इन आरोपों से इनकार किया था। तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीजीपी को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे।
इससे पहले साल 2019 में प्रेमचंद अग्रवाल और भगत राम कोठारी के बीच तीखी झड़प हुई थी। यह घटना केंद्रीय जलशक्ति मंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
इस घटना की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची थी,जिससे उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। प्रेमचंद अग्रवाल पर बैकडोर भर्ती के मामले में भी गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में उन पर इस्तीफे का दबाव भी बना था। उस समय अग्रवाल विधानसभा के स्पीकर थे। उन्होंने इस मामले पर बयान देते हुए कहा था कि विधानसभा बनने के बाद से तदर्थ भर्तियां होती आई हैं,लेकिन उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस बयान से पार्टी और सरकार दोनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। साल 2018 में, जब प्रेमचंद अग्रवाल विधानसभा अध्यक्ष थे, उन पर अपने बेटे को जल संस्थान में नौकरी दिलाने का आरोप लगा था। यह मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था।
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उत्तराखंड अपेडट : प्रेमचंद अग्रवाल ने सीएम धामी को सौंपा इस्तीफा
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इससे पहले प्रेसवार्ता में प्रेमचंद ने अपने इस्तीफे का ऐलान किया तो वे भावुक हो गए और लगभग रो ही पड़े। उन्होंने प्रेस वार्ता में राज्य आंदोलन में अपने संघर्ष और योगदान को गिनाया।
उन्होंने कहा कि जो सदन में बयान दिया था उस पर उसी दिन सदन में स्पष्टीकरण भी दे दिया था। मेरे भाव बिल्कुल गलत नहीं थे। गाली वाला शब्द भी उनके वक्तव्य से पहले का है। जो न तो पहाड़ के लिए कहा गया और न ही मैदान के लिए। वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म उत्तराखंड में हुआ है। कुछ लोगों की ओर से सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया गया। मैं भी आंदोलनकारी रहा हूं, लेकिन आज ये साबित करना पड़ रहा है कि हमने भी प्रदेश के लिए योगदान दिया है। लेकिन आज जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है उससे बहुत आहत हूं। इसलिए मुझे इस्तीफा देना पड़ रहा है।
देखें वीडियो
बता दें कि बीते दिनों बजट सत्र के दौरान सदन में पहाड़ी लोगों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी देने के बाद से लगातार उनका विरोध हो रहा था। तमाम संगठन और विपक्षी दल उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल इस्तीफे का ऐलान करने से पहले अपनी धर्मपत्नी के साथ मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में बने उत्तराखंड शहीद स्मारक पहुंचे थे। उन्होंने अमर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
उत्तराखंड : चर्चित कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने रोते —रोते की इस्तीफे की घोषणा, सीएम से मिलने निकले
देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने आज भरी पत्रकारवार्ता में अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने प्रेसवार्ता में गिने चुने शब्दों में इसकी जानकारी दी और बताया कि वे अपना इस्तीफा सौंपने सीएम पुष्कर सिंह धामी के पास जा रहे हैं। प्रेस वार्ता के उनके चेहरे के भाव संभाले नहीं संभल रहे थे।
उन्होंने कहा कि मेरी बात को जिस तरह से तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत किया गया उससे वे बहुत आहत है। उन्होंने मोदी को भी प्रदेश के विकास का श्रेय दिया।





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