सोलन: केवीके से स्पीति में प्राकृतिक खेती और किसानों की समृद्धि पर जोर - सत्यमेव जयते

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Sunday, March 23, 2025

सोलन: केवीके से स्पीति में प्राकृतिक खेती और किसानों की समृद्धि पर जोर


सोलन। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) लाहौल और स्पीति-II की 5वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक शनिवार को ताबो में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने की। इसमें विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. इंद्र देव, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान और वैज्ञानिक शामिल हुए। आईसीएआर-अटारी जोन-I के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश राणा ने वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।

केवीके ताबो के प्रभारी डॉ. आर.एस. सिपहिया ने स्वागत भाषण दिया और पिछले वर्ष की गतिविधियों की रिपोर्ट के साथ आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने फल, सब्जियों की वैज्ञानिक खेती और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला, जिससे स्पीति घाटी के किसानों को लाभ मिल रहा है। 

प्रो. चंदेल ने अपने संबोधन में सेब की खेती और अन्य कृषि गतिविधियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में केवीके की भूमिका की सराहना की। उन्होंने जौ के बीज चयन और सेब के साथ अंतर-फसल के रूप में इसकी खेती को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। साथ ही, मटर और सब्जियों में प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने हुरलिंग गांव के किसानों द्वारा रसायन-मुक्त खेती की पहल की तारीफ की और कटाई के बाद प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी। इसके अलावा, कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) के गठन को प्रोत्साहित किया।

डॉ. इंद्र देव ने किसानों और विभागों के बीच सहयोग की जरूरत पर बल दिया, जबकि डॉ. राजेश राणा ने स्पीति की पौष्टिक उपज को बाजार में पहचान दिलाने के लिए ब्रांडिंग और एफपीओ को मजबूत करने की बात कही। बैठक में सीबकथॉर्न जैसे औषधीय पौधों के लिए प्रदर्शन क्षेत्र बनाने, वन विभाग के साथ नर्सरी स्थापित करने और जौ की घटती खेती पर चिंता जताई गई। प्रगतिशील किसानों ने सोलर ड्राइअर से फलों-सब्जियों को संरक्षित करने और होमस्टे में स्थानीय उत्पादों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा।

इसी दिन हुरलिंग गांव में आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद में 80 किसानों ने हिस्सा लिया। चर्चा प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण पर केंद्रित रही। किसानों को विश्वविद्यालय और केवीके से तकनीकी सहायता का भरोसा दिया गया। हुरलिंग में एफपीओ स्थापित करने और पंचायत को 'प्राकृतिक खेती पंचायत' घोषित करने की योजना भी बनी।

यह बैठक स्पीति के किसानों के लिए सतत विकास और आर्थिक उन्नति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।


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