सोलन। जिला सोलन पत्रकार एसोसिएशन के कल होने वाले चुनाव में अध्यक्ष और महासचिव पदों पर आमने सामने का मुकाबला तय हो गया है। कुल मिलाकर 56 सदस्यों वाले इस संगठन में अध्यक्ष पद के लिए पुनीत वर्मा और मोहन चौहान के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है। उधर महासचिव पद पर भी रविंद्र शर्मा और अश्विनी शर्मा आमने सामने हैं।
पुनीत वर्मा हिमाचल दस्तक के ब्यूरो चीफ हैं तो मोहन चौहान दैनिक अनंत ज्ञान का सोलन ब्यूरो संभाल रहे है। उधर अश्विन वर्मा दिव्य लाइव के संवाददाता है तो रविंद्र शर्मा पंजाब केसरी के लिए काम करते हैं। संगठन में अध्यक्ष व महासचिव पदों पर चुनाव होते हैं और फिर अध्यक्ष दो वर्ष के लिए अपनी कार्यकारिणी का चयन करते हैं। अब बात कल होने वाले चुनावों की।
दरअसल इस संगठन में होने वाले चुनावों में पत्रकार दो गुटों में बंट जाते हैं और यह जिम्मेदारी उम्मीदवारों के कंधों पर होती है कि वे दोनों ही गुटों के सदस्यों का विश्वास जीतें और चुनाव जीतकर दो वर्षों तक दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाकर चलता रहे। वैसे तो अप्रत्यक्ष रूप से संगठन में ऐसे पत्रकारों का भी एक अलग ही गुट है जो अपने एक एक वोट को लेकर एकला चलो की तर्ज पर अपना विचार रखते हैं। यहीं वे पत्रकार हैं जो चुनाव में उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद की किरण लेकर आते है। न सिर्फ प्रत्याशियों के लिए ये पत्रकार सदस्य तारणहार होते हैं बल्कि दोनों गुटों के लिए भी इनका एक एक वोट बड़े मायने रखता है।
अब मुकाबले पर चर्चा से पहले एक नजर उन अखबारों या मीडिया हाउसों पर भी डाल लें जिनके पत्रकारों की संख्या यहां सर्वाधिक है। इस लिहाज से इस संगठन में सबसे ज्यादा दबदबा हिमाचल दस्तक समाचार पत्र का है। इसके छह पत्रकार संगठन के मतदाता हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर आते हैं अमर उजाला और थर्ड आई। जिनके पांच—पांच पत्रकार संगठन के सदस्य हैं। आपका फैसला और पंजाब केसरी से संबधित चार—चार पत्रकार संगठन के मतदाता है। लाइव टाइम टीवी के तीन पत्रकार संगठन की सदस्यता लिए हुए हैं।
इसके बाद साप्ताहिक ग्रास,दैनिक भास्कर,बीओ लाइव और दैनिक मिलाप के दो —दो पत्रकार भी इस संगठन में शामिल है। इसके अलावा 21 पत्रकार हैं जो संगठन में अपने अपने मीडिया का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही 21 पत्रकार चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इस बार अध्यक्ष पद के लिए संगठन को सबसे ज्यादा पत्रकार देने वाले हिमाचल दस्तक के पुनीत का मुकाबला एकल पत्रकार वाले अनंत ज्ञान के मोहन चौहान के बीच है। दोनों ही मृदु स्वभाव के मालिक हैं और लगभग सभी पत्रकारों से उनके मधुर संबंध हैं। ऐसे में मुकाबला रोचक बन पड़ा है। कल जब नामांकनपत्र दाखिल करने वाले तीसरे और निवर्तमान महासचिव धमेंद्र डढवाल ने नाम वापस लिया और मोहन चौहान और पुनीन वर्मा आमने सामने आ गए तो कुछ लोगों ने एक एक साल के लिए अध्यक्ष पद आपस में बांट लेने का प्रस्ताव भी रखा। लेकिन संगठन में पद के इस तरह द्रोपदीकरण का न तो कोई नियम है और न ही यह विधि मान्य कहा जा सकता है। इसलिए प्रस्ताव सामने आते ही धराशाई हो गया। इसके बाद रातों रात अपने समर्थकों के माध्यम से प्रत्याशियों ने संगठन के सदस्यों को गोलबंद करना शुरू कर दिया। अब कौन कितने ज्यादा लोगों को गोलबंद कर सका है, यह तो कल शाम को आने वाला परिणाम ही बताएगा, लेकिन पत्रकार जगत में चल रही चर्चाओं के बीच लग तो यही रहा है कि मोहन और पुनीत दोनों एक दूसरे को कांटे की टक्कर देने की स्थिति में हैं।
आज शाम और रात दोनों के लिए अहम साबित होगी। ज्यादा मतदाता संख्या वाले कोई भी मीडिया हाउस फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रहा है। ऐसे में सब एक दूसरे को शक की नजर से देख रहे हैं।
अनुभव की बात करें तो पुनीत इससे पहले भी एक बार अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन विजयीश्री उनके कदम नहीं चूम सकी। उधर मोहन चौहान महासचिव पद पर एक बार चुनाव जीत चुके हैं। इस समय दोनों ही पक्ष अपने प्रत्याशी को मजबूत बनाने के प्रयास में हैं। मोबाइल पर व्हाटसअप संदेश भेजकर पत्रकारों से वोट एंड सपोर्ट की अपील की जा रही है। प्रत्याशी पत्रकारों के घरों के दरवाजों पर भी दस्तक दे चुके हैं।
आदर्श रूप से देखा जाए तो कम से कम 29वोट हासिल करने वाले प्रत्याशी विजेता घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन धरातल पर वास्तविकता यह है कि कम से कम तीन सदस्य मतदान में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में 27 वोट हासिल करने वाला प्रत्याशी ही विजेता हो सकता है। कम वोट होते हैं तो एक एक वोट की कीमत बढ़ जाती है। इस चुनाव में भी यही दिखाई पड़ रहा है।
उधर महासचिव पद पर भी रविंद्र और अश्विन शर्मा के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई पड़ रहा है। रविंद्र और अश्विन दोनों ही संगठन के मनोनीत कोषाध्यक्ष रहे हैं। अब दोनों महासचिव पद के लिए आमने सामने हैं।
कल सुबह से वोट पड़ने शुरू होंगे और चार बजे मतदान समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मतगणना शुरू होगी। कुछ ही देर में परिणाम सबके सामने होंगे। जीते चाहे कोई भी हमारी ओर से सभी को चुनाव मैदान में उतरने और अपनी लड़ाई लड़ने के लिए साधुवाद व शुभकामनाएं। हम तो यही चाहेंगे कि मतदान से शुरू हुई कड़वाहट को मतगणना के बाद विजयी व पराजित प्रत्याशी गले मिलकर दुर करें और आने वाले समय में जिम्मेदारी के साथ पत्रकार हितों के लिए आवाज उठाते हुए कुछ ऐसा कर जाएं जिसे देखकर लगे कि सोलन के पत्रकार आपस में नहीं बल्कि बुराइयों से लड़ते हैं।



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