हिमाचल: लाहौल—स्पीति में तीन ग्लेशियर टूटे, चंद्रा नदी रुकी,गियू में आईटीबीपी का कैंप बाल-बाल बचा - सत्यमेव जयते

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Sunday, March 2, 2025

हिमाचल: लाहौल—स्पीति में तीन ग्लेशियर टूटे, चंद्रा नदी रुकी,गियू में आईटीबीपी का कैंप बाल-बाल बचा

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केलांग। मौसम खुलने के बाद जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में हिमखंड गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। लाहौल स्पीती में दो जगहों पर हिमखंड गिरे। रविवार को जिला मुख्यालय केलांग से 12 किमी दूर मूलिंग क्षेत्र में जोबरन के नजदीक पीर पंजाल की चोटी से हिमस्खलन के बाद चंद्रा नदी पर बने बांध से जोबरन पुल को खतरा पैदा हो गया है। उधर स्पपीती घाटी में गियू गांव क्षेत्र में आईटीबीपी कैंप के नजदीक भी एक ग्लेशियर टूट कर नीचे आ गया। गनीमत रही कि आईटीबीपी शिविर से लगीाग दो सौ मीटर दूर ही बर्फ का पहाड़ ठहर गया। उधर अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल के समीप यदलिंग नाले में भी हिमखंड गिरा। हिमस्खलन की चपेट में दो फूड वैन और एक ढाबा आया। मनाली-लेह नेशनल हाईवे पर लगा साइन बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हुआ। फिलहाल कहीं से भी किसी जानी नुकसान की सूचना नहीं है। 

केलांग से 12 किमी दूर स्पीती में जोबरन के पास पीर पंजाल चोटी से खिसका हिमखंड सीधे चंद्रा नदी पर आ गिरा। इससे चंद्रा नदी पर एक बर्फ का बांध बन गया। पिछले दो दिनों से चंद्रा नदी यहीं पर ठहरी हुई है। पीछे से आ रहे पाी के कारण चंद्रा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। पानी बढ़ने के कारण जोबरन पुल को आज खतरा पैदा हो गया। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 

उधर स्पीति घाटी में किन्नौर के पूह उपमंडल से लगते काजा उपमंडल के गियू क्षेत्र में आईटीबीपी कैंप के पास पहाड़ की चोटी से रविवार की पूर्वाहृन 11 बजे के आसपास टूटा हिमखंड  को तेजी से नीचे आया। हिमखंड टूटने की घटना को आईटीबीपी के जवानों ने देखा तो उन्होंने आनन फानन में सुरक्षा उपाय शुरू कर दिए। बर्फ का यह रैला आईटीबीपी कैंप से दो सौ मीटर दूर आकर ठहर गया। तब जवानों ने राहत की सांस ली। बता दें कि गियू गांव में ही देश की पहली ममी मिली थी। यहां से भारत —चीन की सीमा की नो मैन्स लैंड शुरू होती है। इस जगह पर सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी संभाल रही है। जब हिमखंड टूटा उस समय आईटीबीपी के अधिकारी और जवान बर्फ हटाने का काम कर रहे थे।   

वहीं, हिमस्खलन से बंद हुआ अटल टनल के साउथ पोर्टल का मुहाना सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने खोल दिया है। लाहौल में बिजली और सड़कें अभी बहाल नहीं हो पाई हैं। 

लाहौल स्पीति में लगातार तीन दिनों तक बर्फबारी हुई है, जिस कारण रिहायशी इलाकों में दो से साढ़े तीन फीट तक हिमपात हुआ है। पहाड़ों की चोटियों में लगभग 4 से 6 फीट तक बर्फबारी हुई है। अब मौसम खुलने के बाद पहाड़ों से लगातार हिमखंड खिसकने का क्रम शुरू हो गया है। हालांकि हिमखंड गिरने के बाद बीआरओ ने मशीनों की मदद से मलबे को हटा दिया। 

जिले में चार दिनों से बिजली और मोबाइल नेटवर्क प्रभावित हुआ है। स्पीति घाटी में भी यही हाल हैं। लाहौल में भी मयाड़, लोअर पट्टन समेत कई गांवों में बिजली बंद है, जबकि अधिकांश संपर्क सड़कें बंद हैं। स्थानीय प्रशासन ने हिमखंड गिरने की संभावित खतरे को देखते हुए लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है। वहीं कुल्लू जिले में 80 से अधिक सड़कें और बिजली के करीब 500 ट्रांसफार्मर अभी बहाल नहीं हुए हैं।

हिमाचल प्रदेश में सोमवार से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार और मंगलवार को राज्य के अधिकांश इलाकों में भारी वर्षा होने के आसार हैं तो उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात हो सकता है। रविवार को मौसम खुला तो बंद सड़कों को बहाल करने का काम युद्धस्तर पर चला रहा। इसके बावजूद प्रदेश भर में करीब 250 सड़कें और 300 से अधिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर थे। रविवार को धूप खिली तो राहत कार्य दिन भर चले रहे।

हालांकि, उच्च पर्वतीय जनजातीय क्षेत्रों में हिमखंड गिरने का खतरा बना रहा। प्रदेश में यह बारिश और बर्फबारी कृषि व बागवानी फसलों के लिए अच्छी है। इससे जमीन में नमी बढ़ गई है। अच्छी बारिश होने से स्रोतों में भी पानी बढ़ गया है। इससे गर्मियों में पेयजल घटने की आशंका भी कुछ कम हुई है। मौसम केंद्र शिमला के अनुसार केलांग में न्यूनतम तापमान -6.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। अधिकतम तापमान देहरागोपीपुर में 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रविवार को सुंदनगर में घना और मंडी में हल्का कोहरा छाया रहा। ताबो, बिलासपुर और बरठीं में बहुत तेज हवाएं चलीं। ऊना, मंडी, चंबा में अत्यधिक शीत दिवस और कल्पा में भी शीत दिवस रहा।


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