अमृतसर। अमेरिका से 116 अवैध प्रवासियों को लेकर अमेरिकी सेना का विमान शनिवार देर रात करीब 11.38 बजे श्री गुरु रामदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा। पहले 119 लोगों के आने की जानकारी थी, लेकिन तीन लोगों की तबीयत खराब होने के कारण उनकी वापसी अब देरी से होगी।
पहली सूची के अनुसार लौटने वालों में सबसे ज्यादा पंजाब के 67 लोग हैं, जबकि 33 लोग हरियाणा के रहने वाले हैं। इनके अलावा गुजरात के आठ, उत्तर प्रदेश के तीन, गोवा-राजस्थान व महाराष्ट्र के 2-2 और हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर के एक-एक शामिल हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला व पंजाब सरकार के मंत्री व अधिकारी डिपोर्ट हुए लोगों को लेने पहुंचे थे। अमेरिकी विमान में भारतीयों के साथ अमेरिकी सरकार के कुछ अधिकारी, क्रू मेंबर और अमेरिकी सेना के जवान भी थे। एयरपोर्ट पर पहुंचने पर सभी भारतीयों को एक-एक कर निकाला गया।
इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की देखरेख में उनके हवाले कर दिया गया। एयरपोर्ट के अंदर पहले सभी के दस्तावेजों की चेकिंग की गई। इसके साथ यह भी देखा गया कि किसी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया। पिछली बार की तरह इस बार भी अमेरिकी सेना के इस विमान को एविएशन क्लब की तरफ उतारा गया। परिवार के लोग दोपहर का ही एयरपोर्ट पहुंच गए थे। लंबे इतजार के बाद उनकी अपनों से मिलने की हसरत पूरी हुई।
अमेरिका से 157 अवैध प्रवासियों को लेकर रविवार को एक और विमान अमृतसर पहुंचेगा। हालांकि, यह अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि रविवार को आने वाला विमान कितने बजे लैंड करेगा।
अमेरिकी सेना के विमान ने भारतीय समयानुसार शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उड़ान भरी थी, जोकि 36 घंटे का सफर तय कर शनिवार रात 11.38 बजे अमृतसर पहुंचा। वहीं, भारतीयों के निर्वासित किए जाने पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सभी अपने लोग हैं। भले ही वह किसी भी तरीके से विदेशी धरती पर गए थे लेकिन उन सभी को पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा। साथ ही जो युवा लौट रहे है, उनको उनकी काबलियत के मुताबिक काम भी दिया जाएगा ताकि वह अपने देश में ही रहकर रोजी रोटी कमा सकें।
गौरतलब है कि इससे पहले 5 फरवरी, 2025 को 104 भारतीयों को अमेरिकी सेना के विमान में हाथों में हथकड़ी और पांव में बेड़ियां लगाकर लाया गया था। इस पर केंद्र सरकार को विपक्षी दलों का विरोध झेलना पड़ा था।
उम्मीद की जा रही है कि निर्वासित भारतीयों के साथ इस बार कैदियों जैसा व्यवहार नहीं होगा। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।


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